शनिवार, 4 दिसंबर 2010

'कौवे' ने फिर काँव काँव किया बड़े दिनों के बाद.

अरे!

'कौवे' ने फिर काँव काँव किया  बड़े दिनों के बाद
कोयल के घोंसले को अपना बताना कौवों का जगजात फितूर है.
जनाब जमाल साहब मै ये नहीं चाहता था पर ना लिखना मुनासिब ना समझा.
आप कैसे विद्वान है जो सवाल को बदगुमानियत का दर्ज़ा देते है.
एक किस्सा सुनाये आपको..
चिडयाघर में एक चुटकुले पर दो घोड़े हस रहे थे गधा चुप था चौथे या पाचवे दिन गधा एकाएक हसने लगा तो पहले घोड़े ने दूसरे से पूछा कि आज बिना बात के यह गधा क्यों हस रहा है तो गधे ने खुद जवाब पोस्ट किया कि मुझे चुटकुला आज जा कर समझ में आया.
इतने दिन बाद अपर्णा जी  के कम्मेंट पर पोस्ट लिखने का सबब क्या है?
मुझे मालूम है कि अभी पूरा गिरोह चाव चाव करेगा एक नहीं दस दस कमेन्ट मुझ पर किये जायेगे
जमाल साहब 'अजीत' के अंदाज में मुह में राम बगल में छुरी रखकर प्यारी बाते कहेगे.
.....और भास्कर जी क्या कहे आपको आप भी इरादा नहीं समझ पाते.
जनाब जमाल अब आप अपने इरादे जरा स्पष्ट शब्दों में बता दे.
हां या नहीं में जवाब दे (केवल हा या नहीं )
१. सम्पूर्ण भारत इसलाम का अनुयायी बन जाय
२. आपने एक बार टिप्पणी की थी कि ओबामा की दादी को सम्पूर्ण विश्व के लिए यही दुआ मांगनी चाहिए.(शायद तौसीफ जी की पोस्ट थी जिसमे ओबामा की दादी चाहती थी की ओबामा इसलाम कबूल करले). आपकी दिली इच्छा पूरे विश्व को इसलाममय देखने की है.
३. ईश्वर ही अल्लाह का पर्याय है.
एक बात मै आपको स्पष्ट कर दू और आपके पूरे गिरोह को कि 'अल्लोप्निषद' या 'भविष्यपुराण' अकबर के समय में रचे गए है. ये 'ओरिएन्तेद' रचनाये है जिनका प्रयोग आप जैसे विद्वान ही कर सकते है.
सुधी पाठक गण नीचे लिंक को पढ़कर जमाल जी के विचार देखे और अपर्णा जी के कमेंट्स फिर उसमे क्या बद्गुमानियत है बताये.

http://vedquran.blogspot.com/2010/03/blog-post.html
Monday, March 1, 2010 कौन कहता है कि ईश्‍वर अल्लाह एक हैं

आम तौर पर लोग यह समझते हैं कि गांधी जी ने बताया है ‘‘ ईश्‍वर अल्लाह तेरो नाम सबको सन्मति दे भगवान ‘‘ या फिर लोग कहते हैं कि साईं बाबा ने कहा है कि
सबका मालिक एक
और अल्लाह मालिक
लेकिन हकीक़त कुछ और है...हकीकत क्या है? बताओगे ?
वैदिक साहित्य तो इसका उद्घोश तब से कर रहे हैं जब मुसलमान भारत में आये भी नहीं थे ।

अल्लोपनिषद इसी महान सत्य का उद्घोश है ।भारत की हिन्दू मुस्लिम समस्या के खात्मे के लिए भी यह अकेला उपनिषद काफ़ी है और भारत को विश्‍व गुरू बनाने के लिए भी ।
अल्लो ज्येष्‍ठं श्रेष्‍ठं परमं पूर्ण ब्रहमाणं अल्लाम् ।। 2 ।।
अल्लो रसूल महामद रकबरस्य अल्लो अल्लाम् ।। 3 ।।
अर्थात ’’ अल्लाह सबसे बड़ा , सबसे बेहतर , सबसे ज़्यादा पूर्ण और सबसे ज़्यादा पवित्र है । मुहम्मद अल्लाह के श्रेष्‍ठतर रसूल हैं । अल्लाह आदि अन्त और सारे संसार का पालनहार है । (अल्लोपनिषद 2,3)
इस पर अपर्णा जी की टिप्पणी  है......
'आप जिस उपनिषद की बात कर रहे है , कृपया उसके रचयिता का नम भी बता दीजिये ।
और रही बात ईशवर और अल्लाह के अलग होने की , तो हो सकता है आप ने दोनो को साक्षात अलग अलग देखा हो , और यह आपका परम सौभाग्य रहा होगा ।
हो सकता है । आपका प्रयास सफल हो हम तो यही दुआ करते है । आप अपने जीवन में अपने धर्म को श्रेष्ठ बताने में सफल हो जायें क्योकिं हमे तो इसकी तनिक भी जरूरत नही। हम सूरज को आइना नही दिखाते । क्या नवीन है और क्या पुरातन शायद यह जानने के लिये आपको अभी और अध्धययन की आवश्यकता है ।'

यहाँ मै अपने सुधी पाठकों को एक बात और बताना चाहूँगा कि मैने बृहस्पतिवार, ११ नवम्बर २०१० को जमाल साहब को एक पत्र लिखा था एक पत्र-पुष्प अनवर जमाल के नाम 

आज तक जमाल साहब तक शायद यह पत्र पहुँचा ही नही या वह अभी जवाब लिख ही रहे है ? जो भी हो अभी तक हमारा इंतजार जारी है